सोमवार, 31 मार्च 2008

५५.बेवफ़ाई के !








बेवफ़ाई के किस्से सुनाऊँ किसे . बात घर की है अपनी बताऊँ किसे.

कौन दुनियाँ मैं अपना तलबगार है, फोन किसको करूँ मैं बुलाऊँ किसे.

दूध का मैं जला छाछ से भी डरूं, प्यास अपनी जहां में दिखाऊँ किसे .

रूठने और मनाने के मौसम गये, किससे रूठूं मैं अब, मैं मनाऊँ किसे.

शाख पर मेरी फल आगये इन दिनों, खुद ही झुक जाता हूं अब झुकाऊँ किसे .

उसको महलों में रहने की आदत पड़ी, झोपड़ी अपनी अब मैं दिखाऊँ किसे .

आँसुओं की सौगात मुझको मिली, खुद ही रो लेता हूं अब रुलाऊँ किसे .

५४. तुम्हे जिन्दगी !


तुम्हे जिन्दगी के उजाले मुबारक ,

हमे अंधेरे रास आने लगे है


५३.तरसते थे जो !


तरसते थे जो मिलने को कभी ,

आज वो क्यों मेरे साये से कतराते हैं ,

हम भी वही दिल भी वही ,

ना जाने क्यों लोग बदल जाते है .!!!!

५२. दीवाने हो गए !












दीवाने हो गए हम जीनकी याद मे ,

वो हम ही से बेगाने हो गए ,

शायद उन्हें तलाश है अब नये प्यार की ,

क्युंकी उनकी नज़र मे हम पुराने हो गए !!

५१. हमें काश की !










हमें काश की वो नगमे ना सुनाये होते ,

आज उनको सुनकर ये अश्क ना आये होते ,

जो भुला देना था हमें ,

तो इतनी गहराई से दिल मे समाये ना होते !!

५०.हुनर नही आता !














हुनर
नही आता हमें दिलों से खेलनेका ,

इसिलिये इश्क की बाजी हम हार गए ,

शायद उन्हें था मेरी जिन्दगी से बहुत प्यार ,

इसिलिये मुझे जीत -ऐ - जी ही मार गए ।

४९. अपनी कीस्मत के !











अपनी कीस्मत के आगे बेबस है इंसान ,

बेबस है खवाब हकीकत के आगे ,

कोई रुकी हुई धड़कन से पूछे ,

कीतना तड़पता है दिल मोहब्बत के आगे !!