सोमवार, 31 मार्च 2008

६२.कैसे बयान करूं !


कैसे बयान करूं मैं हालत अपनी ,
तेरी जुदाई मे इतना तद्फा हू ,
न रोता हू न हँसता हू बस तेरी राह देखता हू ,
हर कीसी मे तेरी झलक देखता हू ,
अब तो चले आना मेरे दोस्त ,
तेरी राहों मे पलके बिछायें बेठा हू -ऐ दोस्त !!

६१. आपके नाम !


आपके नाम ....दर्दे -ऐ -दिल ......

टूटे हुवे पेइमनोमे मे जाम नही आते ,

इसक मे दीवाने दिल कहीं आराम नही पते ,

कह्दो जाके उन बेवफा ओ से .........की ,

टूटे हुवे दिल कीसी के काम नही आते !!

६०.ना जाने क्यों !





















ना जाने क्यों ये ऑंखें उदास रहती है ,
इन आँखों मैं कीसी की प्यास रहती है ,
ये जानकर भी की वो मेरी कीस्मत मैं नही ,
फीर भी क्यों उन्हें पाने की आस रहती है !!

५९. दीखा कर खवाब !












दीखा कर खवाब इन आंखों को ,
दे गए आँसू इन में तुम ,
कैसे छलका दु ये आँसू ,
इन में भी तो रह ते हो तुम !!


५८. खुशियों से नाराज़ !


खुशियों से नाराज़ है मेरी जिन्दगी ,
प्यार की मोहताज है मेरी जिन्दगी ,
हस लेता हू कभी लोगों को देख कर ,
वरना दर्द की किताब है मेरी जिन्दगी!!

५७. कभी तोह अपना !

कभी तोह अपना बना के दिखाओ ,

यकीन करो और सच्चे हो के दिखाओ ,

जूठ ख़ुद से एक धोका है ,

कमसेकम अपनों को तोह ना सताओ !!

५६.कैसे आगे बढे !


कैसे आगे बढे हम जब ,
मंजिल ही हमारी कहीं पीछे टहर गई,
गुजर रहे थे जब उसके पास से ,
ना उसने रोका , ना उसने आवाज दी ,
सिर्फ़ खामोश रह गई !